तुम्ही मेरे स्वामी

भगवान् तुम ही मेरे स्वामी भगवान् नाथ हो। भगवान् ये शरीर भी तुम्हारा ही बनाया हुआ है। भगवान् इस शरीर के मालिक आप ही हो। हे परमात्मा जी शरीर की सुरक्षा आप के हवाले हैं। हे भगवान् आप की कृपा पर सब कुछ निर्भर है। परमात्मा जी इस मन के दिल के आत्मा के मालिक आप ही हैं। हे परमात्मा जी इस मन में दिल में शान्ति प्रेम सद्भावना प्रदान करो। प्राणी के दिल में लोभ और मोह ने घेरा डाल लिया है। जब दिल में प्रेम शान्ति विस्वास आ जाएगा। वहां लोभ और मोह ठहरता नहीं। प्रेम तृप्ति त्याग और शान्ति का मार्ग सत्य का मार्ग है । हमारे ह्दय में विश्वास की जागृत हो और हम नव निर्माण की ओर बढे।
अनीता गर्ग

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