शान्ति मेरे अंदर समाई

‌परमात्मा ने मुझे पृथ्वी पर बना कर भेजा है। मै परमात्मा को याद करूँ या नही पर परमात्मा हर क्षण मेरे साथ है। मै बाहरी संसार में सुख ढुढता हूँ। मेरा सुख मेरे अंदर समाया है। मै शान्ति चाहता हूं। शान्ति कही बाहर नहीं शान्ति मेरे अंदर समाई है। मै अपने आप से बात करके अपनी ईच्छाओ को समय अनुकूल बना लेता हूँ। तो शान्ति मेरे अंदर समा जाएंगी। शान्ति कोई देता नहीं शान्ति हमे परमात्मा देकर भेजता है। हम परमात्मा का चित से चिन्तन करते हैं। हमारे अन्दर भाव और विचार की जागृति होने लगेगी। तब हमें प्रेम की परिभाषा समझ आती है। संसार में जो प्रेम दिखाई देता है वह लेन देन पर आधारित है। इसे प्रेम नहीं कहा जा सकता। प्रेम तो मीराबाई ने भगवान् कृष्ण से किया। मीराबाई ने अपना जीवन भगवान् के चरणों में समर्पित कर दिया ।प्रेम आत्मा की गहराई से किया जाता है। प्रेमी के ह्दय की एक ही पुकार होती है कि किस तरह से मेरे स्वामी भगवान् नाथ का बन जाऊँ।
‌ अनीता गर्ग

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