जगत पिता सबका मालिक

पृथ्वी पर कोई अकेला नहीं आता परमात्मा हर प्राणी के दिल में बैठा होता है। हम नासमझ बनकर कहते हैं कि प्राणी संसार में अकेला आता है और अकेला ही जाता है। हम संसार के भोतिक पदार्थों में उलझे रहते हैं। हमारे अन्दर मैं प्रवेश कर जाता है। हम संसार में आकर अनेक सम्बन्ध बनाते हैं। हम सम्बन्धो में अपनापन नहीं पाते शान्ति मिले तो कैसे मिले। क्योंकि सम्बन्धो का सम्बन्धी तो हमारे अन्दर बैठा होता है। जिस दिन परम सत्य के स्वरूप परम प्रकाश पुंज को ह्दय में चेतन रूप में निहारते है। उसी दिन हमे सब सम्बन्ध पूर्णतः लगते है। क्योंकि वह निराकार हमे हर प्राणी में दिखाई देता है। साधक के दिल में अपने स्वामी भगवान् नाथ से मिलने की तङफ हर क्षण बनी रहती है। साधक अन्तर्मन से प्रार्थना करते हुए कहता है कि हे परमात्मा जी मेरी हर क्रिया में तुम समा जाओं मैं तुम्हारे बैगर एक पल भी न रहु। हे मेरे स्वामी भगवान् नाथ दिल की हर धङकन में तुम समा जाओ।प्राणी संसार से जब जाता है तब परमात्मा का नामधन परमात्मा की पुकार परमात्मा की वह अनेक प्रकार से विनती और स्तुति करता है। ये सब करते हुए जब प्राणी का व्यवहार बदलता है। तब परमात्मा साधक की पुकार को सार्थक करता है। जगत पिता सबका मालिक हैं।
अनीता गर्ग

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