कर्म के साथ भगवान् खड़े

‌कर्म जीवन की सच्चाई है। भगवान् कर्म के साथ खड़े है।हमे जीवन में सुरक्षा करनी है तो अपने कर्म की करनी है। कर्म सबसे बड़ा धन है। क्योंकि कर्म करके प्राणी के जीवन में जो सुख शांति और समरिधी आती है।वह शान्ति अन्य किसी भी साधन से नहीं आ सकती है ।कोई आप से धन मांगता है तो धन दे दो। धन जीवन की सच्चाई नहीं कर्म जीवन की सच्चाई है। एक बिमार व्यक्ति सेवा से ठीक होता है या नहीं पर कार्य करके अवश्य ठीक हो जाता है। कार्य करते हुए एक विश्वास जागृत होगा कि मैं बिमार नहीं हूँ। अन्तर्मन का विश्वास सबसे बड़ी दवाई है। पृथ्वी पर आकर जो भी बन कर गया है। वह सख्त परिश्रम करके ही बन कर गया है। हम कबीर दास जी रविदास जी और अनेक भक्तों जीवन चरित्र को पढते हैं तब पाते हैं कि इन्होंने ने अपने जीवन को बैठ कर नहीं बिताया है। कबीर दास जी कपङा बुनते हुए साखिंया गाते थे ।कर्म मार्ग के द्वारा साधक गहरे चिन्तन में उत्तर सकता है। क्योंकि कर्म के द्वारा साधक में विश्वास की दृढता शान्ति और हौसला बनता है।कर्म के साथ साधना करते हुए जिसने जीवन जीया है। भगवान् उसे बार बार दर्शन देने आए हैं। साधक कहता है कि भगवान जी मै पहले कर्तव्य को पुरा कर लु। एक कर्म निष्ठ व्यक्ति को कोई तोड़ नहीं सकता।क्योंकि उसके साथ भगवान् खङे होते हैं। राम जी और कृष्ण जी को हम भगवान् मानते हैं। राम जी और कृष्ण जी के जीवन चरित्र से शिक्षा ग्रहण नहीं करते। यही हम पीछे रह जाते हैं। हम तो राम राम और कृष्ण कृष्ण की रट लगा कर बैठे बैठे ही सब सुख चाहते है। भगवान् राम और कृष्ण जी जन जन के कल्याण में अपने जीवन को समर्पित कर के गए हैं।
‌ अनीता गर्ग

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *